Friday, 6 March 2026

Bihar News: टारगेट पर था कोई और, मार दिया 13 साल का मासूम... पुलिस ने किया अधिवक्ता पुत्र हत्याकांड का सनसनीखेज खुलासा

अनिल वर्मा - सहरसा | बिहार के सहरसा जिले में 18 फरवरी को सिमराहा चौक के पास हुई अधिवक्ता अनुज कुमार के 13 वर्षीय मासूम की हत्या कोई इत्तेफाक नहीं थी। यह एक गहरी साजिश का नतीजा थी, जिसमें टारगेट पर कोई और था, लेकिन मौका न मिलने पर अपराधियों ने एक बेकसूर बच्चे को मौत के घाट उतार दिया। सहरसा पुलिस की एसआईटी टीम ने वैज्ञानिक अनुसंधान के जरिए इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाते हुए मुख्य साजिशकर्ता राजीव कुमार उर्फ बौआ ठाकुर को गिरफ्तार कर लिया है। इस मामले में अब तक कुल 9 आरोपी सलाखों के पीछे पहुँच चुके हैं।

क्या था पूरा मामला?

सदर थाना क्षेत्र के सिमराहा में 18 फरवरी को बाइक सवार अज्ञात बदमाशों ने स्कूल से घर लौट रहे व्यवहार न्यायालय सहरसा के अधिवक्ता अनुज कुमार के 13 वर्षीय पुत्र अंकित को गोली मार दी। गंभीर रूप से जख्मी छात्र का इलाज के दौरान दर्दनाक मौत हो गई। घटना की गंभीरता को देखते हुए एसपी हिमांशु के निर्देश पर सदर एसडीपीओ आलोक कुमार के नेतृत्व में एसआईटी का गठन किया गया था। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी सर्विलांस और मुखबिरों की सूचना के आधार पर पुलिस एक-एक कर अपराधियों तक पहुँच गई।

पति-पत्नी के झगड़े से शुरू हुई खूनी खेल की साजिश

पुलिस जांच में जो कहानी सामने आई है, वह हैरान करने वाली है। दरअसल, मुख्य आरोपी राजीव कुमार का अपनी पत्नी से अक्सर विवाद रहता था। इस पारिवारिक कलह में राजीव की पत्नी का रिश्तेदार होने की वजह से अधिवक्ता अनुज कुमार लगातार दखलंदाजी करता था। इस बात से बौखलाए राजीव ने अपने भाई रंजन ठाकुर के साथ मिलकर अनुज को ही रास्ते से हटाने (मारने) का खौफनाक प्लान बना डाला।

दुश्मनों ने मिलाया हाथ, दी गई सुपारी

राजीव को पता था कि अधिवक्ता अनुज को पड़ोसियों के साथ भी पुराने विवाद चल रहे हैं। राजीव ने इसी का फायदा उठाया। राजीव ने अनुज के पड़ोसी पारस ठाकुर से संपर्क किया, जिसका अनुज के साथ लंबे समय से रास्ते को लेकर विवाद था। पारस ने अपना रास्ता साफ करने के लिए हत्या की सुपारी ले ली, फिर पारस के साथ एक अन्य पड़ोसी पवन ठाकुर भी इस साजिश में शामिल हो गया, जिसका वादी से पोखर की जमीन का पुराना झगड़ा था।


4 महीने तक की रेकी, फिर मासूम की दी बलि

सुपारी मिलने के बाद हत्यारों ने नवंबर महीने में एक नया मोबाइल और सिम कार्ड खरीदा ताकि पुलिस की नजर से बच सकें। लगभग 4 महीने तक वे अधिवक्ता अनुज का पीछा करते रहे, लेकिन उन्हें हत्या करने का सही मौका नहीं मिला। जब मुख्य टारगेट हाथ नहीं लगा, तो साजिशकर्ता राजीव ने हत्यारों को एक नया और खौफनाक फरमान सुनाया। उसने कहा कि वादी को भारी नुकसान पहुँचाने के लिए उसके परिवार के "किसी भी सदस्य" की हत्या कर दी जाए। इसी अंधी साजिश का शिकार वह 13 साल का बेकसूर बच्चा हो गया।

शानदार जांच के लिए पुलिसकर्मी होंगे पुरस्कृत

एसपी हिमांशु ने बताया कि यह पूरी तरह से एक योजनाबद्ध और सुनियोजित हत्या थी। अपराधियों के इरादे और मकसद को पूरी तरह से उजागर कर दिया गया है। इस कांड के 'गुणात्मक अनुसंधान' और बेहतरीन साक्ष्य जुटाने के लिए अनुसंधानकर्ता को पुलिस विभाग द्वारा विशेष रूप से पुरस्कृत किया जाएगा।

इस टीम ने किया खुलासा:

हत्याकांड की गुत्थी सुलझाने वाली एसआईटी में सदर एसडीपीओ आलोक कुमार, साइबर थाना डीएसपी अजीत कुमार, अनुसंधानकर्ता जितेंद्र ठाकुर, रौशन कुमार, गुंजन कुमार, सनोज वर्मा के साथ जिला आसूचना इकाई और सदर थाना का सशस्त्र बल शामिल रहा। 

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