सहरसा में वैश्य समाज व सिमरी बख्तियारपुर में भाजपा एवं युवा क्रान्ति ने आयोजित किया कार्यक्रम
सहरसा/सिमरी बख्तियारपुर से डेक्स रिपोर्ट :-
राष्ट्रवाद के प्रणेता, सुशासन के संवाहक एवं विश्व पटल पर भारत का मान बढ़ाने वाले जन नेता ‘भारत रत्न’ पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 94 वी जयंती सहरसा एवं सिमरी बख्तियारपुर में श्रद्धा पूर्वक मनाई गई।
सहरसा में वैश्य समाज के तत्वाधान मे नगरपरिषद के वार्ड संख्या 04 के बजरंगबली स्थान मे जिलाध्यक्ष मोहन प्रसाद साह की अध्यक्षता एव़ं जिला प्रवक्ता राजीव रंजन साह के संचालन मे आयोजित कर अटल जी को श्रद्धा सुमन अर्पित की गई।
इस मौके पर अमोल साह, मनोज साह, विभाष कुमार, धीरज कुमार, बिट्टू कुमार, विधानंद साह, सुशील साह, सहदेव मिस्त्री, संजय साह, उमेश साह, अमरेंद्र कुमार, रंजीत चौधरी, डॉक्टर मणिभुषण साह, सरोज कुमार, रूपेश साह आदि मौजूद रहे।
वही सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के नगर पंचायत स्थित स्टेशन चौक पर बीजेपी नेताओं ने कार्यक्रम आयोजित कर अटल जयंती मनाया
इस मौके पर नगर अध्यक्ष संजीव भगत ,नगर महामंत्री सह विधानसभा सोशल मीडिया प्रमुख रौशन राज बादशाह,भाजयुमो अध्यक्ष सोनू कुमार ,पूर्वी मंडल महामंत्री सह विधानसभा मीडिया प्रमुख कुमार आनंद जी ,महिला नेत्री नीलम भगत,,पूर्वी मंडल अध्यक्ष रमेश कुमार सिंह, पशिमी अध्यक्ष राजकिशोर सिंह, विधानसभा प्रभारी मंगल शर्मा, प्रदीप गुप्ता, सुमित भगत, रितेश वीर जायसवाल, सिंपल चौरसिया, अरुण पासवान, रिककी जयसवाल आदि लोग उपस्थित रहे।
वही युवा क्रान्ति के संरक्षक खगेश कुमार की अगुवाई में अटल जयंती समारोह मनाया गया। इस मौके आलोक कुमार, रानू कुमार, निसान कुमार, बिपिन कुमार, प्रेमकुमार चोपड़ा, गोलू कुमार, अमित कुमार, विशाल कुमार, सिकेन्द्र शाह, पंकज निगम, अमित कुमार गोलू, सुदर्शन कुमार, हेमंत कुमार, सुमित कुमार, रितेशबीर जैसवाल, संजीव कुमार, भोला कुमार, राजेश कुमार, विवेक कुमार आदि मौजूद रहे।
जानें कौन थे अटल बिहारी :-
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता, कवि, पत्रकार, और प्रखर वक्ता थे। राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का प्रवेश 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने के साथ हुआ। इस आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से उन्हें और उनके बड़े भाई प्रेम को 23 दिनों तक जेल में रहना पड़ा।
आजादी के बाद वे जनसंघ के नेता बने। वाजपेयी ने अपना पहला चुनाव 1957 में उत्तर प्रदेश की बलरामपुर सीट से लड़ा था। वो बाद में पार्टी के 1969 से लेकर 1972 तक अध्यक्ष भी रहे। 1997 में वो मोरार जी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री भी बनाए गए थे।अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार देश के प्रधानमंत्री मई 1996 में बने। हालांकि इस दौरान उनकी सरकार महज 13 दिन में ही अल्पमत में आ गई और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया ।
अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न ने नवाजा। अटल बिहारी वाजपेयी देश के 10 वें प्रधानमंत्री थे। वह तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 16 मई 1996 से 1 जून तक, दूसरी बार साल 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और तीसरी बार 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई से 2004 तक।
भारत को विश्वशक्ति बनाने के लिए परमाणु बम का परीक्षण कर अटल बिहारी वाजपेयी ने लीग से हटकर पहली बार पोखरण में एक के बाद एक पांच परमाणु बम परीक्षण करने का माद्दा दिखाया। उन्होंने बड़े ही गोपनीय तरीके से इस परीक्षण को अंजाम दिलाया ।
वे राजनेता से पहले पत्रकार व कवि थे । उन्होंने पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, वीर अर्जुन और स्वदेश जैसे अखबारों और पत्रिकाओं का संपादन किया था।
अटल जी देश के ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने 1977 में सयुंक्त राष्ट्र की सभा में हिंदी भाषण दिये ।
अटलजी ने ही सयुंक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा को पहचान दिलवाई थी। साल 2015 में उन्हें भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी को युग पुरूष की संज्ञा दी गई।
अटल जी की नेतृत्व वाली सरकार मे कोशी वासियो को ईस्ट- वेस्ट कॉरिडोर सहित कई परियोजना इस क्षेत्र के लोगों को मिला। अटल जी एक आदर्श राजनेता के साथ ही एक राष्ट्रभक्त कवि एवं साहित्यकार के रूप में अपना सम्पूर्ण जीवन भारत माता को परमवैभव तक ले जाने के लिये कार्य करने की जाने जाते हैं । अपने प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में मिथिलांचल के विकास के लिये जो उन्होंने काम किया वो अविस्मरणीय है।
सहरसा/सिमरी बख्तियारपुर से डेक्स रिपोर्ट :-
राष्ट्रवाद के प्रणेता, सुशासन के संवाहक एवं विश्व पटल पर भारत का मान बढ़ाने वाले जन नेता ‘भारत रत्न’ पूर्व प्रधानमंत्री श्रद्धेय स्व. अटल बिहारी वाजपेयी की 94 वी जयंती सहरसा एवं सिमरी बख्तियारपुर में श्रद्धा पूर्वक मनाई गई।
सहरसा में वैश्य समाज के तत्वाधान मे नगरपरिषद के वार्ड संख्या 04 के बजरंगबली स्थान मे जिलाध्यक्ष मोहन प्रसाद साह की अध्यक्षता एव़ं जिला प्रवक्ता राजीव रंजन साह के संचालन मे आयोजित कर अटल जी को श्रद्धा सुमन अर्पित की गई।
इस मौके पर अमोल साह, मनोज साह, विभाष कुमार, धीरज कुमार, बिट्टू कुमार, विधानंद साह, सुशील साह, सहदेव मिस्त्री, संजय साह, उमेश साह, अमरेंद्र कुमार, रंजीत चौधरी, डॉक्टर मणिभुषण साह, सरोज कुमार, रूपेश साह आदि मौजूद रहे।
वही सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड के नगर पंचायत स्थित स्टेशन चौक पर बीजेपी नेताओं ने कार्यक्रम आयोजित कर अटल जयंती मनाया
इस मौके पर नगर अध्यक्ष संजीव भगत ,नगर महामंत्री सह विधानसभा सोशल मीडिया प्रमुख रौशन राज बादशाह,भाजयुमो अध्यक्ष सोनू कुमार ,पूर्वी मंडल महामंत्री सह विधानसभा मीडिया प्रमुख कुमार आनंद जी ,महिला नेत्री नीलम भगत,,पूर्वी मंडल अध्यक्ष रमेश कुमार सिंह, पशिमी अध्यक्ष राजकिशोर सिंह, विधानसभा प्रभारी मंगल शर्मा, प्रदीप गुप्ता, सुमित भगत, रितेश वीर जायसवाल, सिंपल चौरसिया, अरुण पासवान, रिककी जयसवाल आदि लोग उपस्थित रहे।
वही युवा क्रान्ति के संरक्षक खगेश कुमार की अगुवाई में अटल जयंती समारोह मनाया गया। इस मौके आलोक कुमार, रानू कुमार, निसान कुमार, बिपिन कुमार, प्रेमकुमार चोपड़ा, गोलू कुमार, अमित कुमार, विशाल कुमार, सिकेन्द्र शाह, पंकज निगम, अमित कुमार गोलू, सुदर्शन कुमार, हेमंत कुमार, सुमित कुमार, रितेशबीर जैसवाल, संजीव कुमार, भोला कुमार, राजेश कुमार, विवेक कुमार आदि मौजूद रहे।
जानें कौन थे अटल बिहारी :-
अटल बिहारी वाजपेयी का जन्म 25 दिसंबर 1924 को मध्य प्रदेश के ग्वालियर में हुआ था। भारत के पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी राजनेता, कवि, पत्रकार, और प्रखर वक्ता थे। राजनीति में अटल बिहारी वाजपेयी का प्रवेश 1942 में भारत छोड़ो आंदोलन में हिस्सा लेने के साथ हुआ। इस आंदोलन में हिस्सा लेने की वजह से उन्हें और उनके बड़े भाई प्रेम को 23 दिनों तक जेल में रहना पड़ा।
आजादी के बाद वे जनसंघ के नेता बने। वाजपेयी ने अपना पहला चुनाव 1957 में उत्तर प्रदेश की बलरामपुर सीट से लड़ा था। वो बाद में पार्टी के 1969 से लेकर 1972 तक अध्यक्ष भी रहे। 1997 में वो मोरार जी देसाई की सरकार में विदेश मंत्री भी बनाए गए थे।अटल बिहारी वाजपेयी पहली बार देश के प्रधानमंत्री मई 1996 में बने। हालांकि इस दौरान उनकी सरकार महज 13 दिन में ही अल्पमत में आ गई और उन्होंने अपने पद से इस्तीफा दे दिया ।
अटल बिहारी वाजपेयी को वर्ष 2015 में नरेंद्र मोदी की सरकार ने देश के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न ने नवाजा। अटल बिहारी वाजपेयी देश के 10 वें प्रधानमंत्री थे। वह तीन बार देश के प्रधानमंत्री बने। पहली बार 16 मई 1996 से 1 जून तक, दूसरी बार साल 19 मार्च 1998 से 26 अप्रैल 1999 तक और तीसरी बार 13 अक्टूबर 1999 से 22 मई से 2004 तक।
भारत को विश्वशक्ति बनाने के लिए परमाणु बम का परीक्षण कर अटल बिहारी वाजपेयी ने लीग से हटकर पहली बार पोखरण में एक के बाद एक पांच परमाणु बम परीक्षण करने का माद्दा दिखाया। उन्होंने बड़े ही गोपनीय तरीके से इस परीक्षण को अंजाम दिलाया ।
वे राजनेता से पहले पत्रकार व कवि थे । उन्होंने पांचजन्य, राष्ट्रधर्म, वीर अर्जुन और स्वदेश जैसे अखबारों और पत्रिकाओं का संपादन किया था।
अटल जी देश के ऐसे पहले नेता हैं, जिन्होंने 1977 में सयुंक्त राष्ट्र की सभा में हिंदी भाषण दिये ।
अटलजी ने ही सयुंक्त राष्ट्र में हिंदी भाषा को पहचान दिलवाई थी। साल 2015 में उन्हें भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। भारत के सबसे बड़े सम्मान भारत रत्न से सम्मानित किया गया। अटल बिहारी वाजपेयी को युग पुरूष की संज्ञा दी गई।
अटल जी की नेतृत्व वाली सरकार मे कोशी वासियो को ईस्ट- वेस्ट कॉरिडोर सहित कई परियोजना इस क्षेत्र के लोगों को मिला। अटल जी एक आदर्श राजनेता के साथ ही एक राष्ट्रभक्त कवि एवं साहित्यकार के रूप में अपना सम्पूर्ण जीवन भारत माता को परमवैभव तक ले जाने के लिये कार्य करने की जाने जाते हैं । अपने प्रधानमंत्रित्व कार्यकाल में मिथिलांचल के विकास के लिये जो उन्होंने काम किया वो अविस्मरणीय है।


















