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Wednesday, 22 August 2018

अब छोटे गांवों के किसान पुत्र भी बनने लगे है अफिसर

गत दिनों जारी बीपीएससी परीक्षा में कई गुमनाम परिवारों के लाल ने किया कमाल

सिमरी बख्तियारपुर के महम्मदपुर एवं तरियामा से दो लाल ने अफिसर की कुर्सी थामा

सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) से ब्रजेश भारती की विशेष रिपोर्ट :-
लहरों से डरकर नौका पार नहीं होती , कोशिश करने वालों की कभी हार नहीं होती । हरिवंश राय बच्चन की इन पंक्तियों को सच कर दिखाया है सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर प्रखंड क्षेत्र के दो किसान पुत्रों ने। 
एक ने पहले प्रयास में दो दुसरे ने दुसरे प्रयास में बीपीएससी 56,59 वीं परीक्षा में सफलता प्राप्त किया है।

हम बात करें सफलता प्राप्त करने वाले महम्मदपुर पंचायत के बेलाटोल निवासी अमला देवी/ मनोज यादव के पुत्र कुमार उमाशंकर की तो उसने दुसरे प्रयास में यह सफलता प्राप्त किया है। सफलता से परिवार में खुशी का माहौल है। खुशी हो भी क्यों नहीं बेटा अफिसर जो बन गया है।  बीपीएससी में 485 वां रैंक ला कर सहायक योजना पदाधिकारी/सहायक निर्देशक के पद पर विराजमान होंगे।
कुमार उमासंकर (फाईल फोटो)
चयन पर चाचा दिनेश प्रसाद यादव, विनोद यादव, महेंद्र यादव, मुकेश यादव ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहते हैं आज उसने दिखा दिया है कि किसान पुत्र भी अफसर बन सकता है। 

अपनी सफलता का श्रेय मामा महेन्द्र यादव एवं बड़े भाई कुमार हिमांशु (एनटीपीसी बाढ़ में अभियंता) के साथ माता पिता को देते हुए कहते हैं परिश्रम से सफलता प्राप्त की जा सकती है लेकिन लगन सच्ची हो।

कुमार उमासंकर के छोटे भाई बीएनएमयू छात्र राजद के उपाध्यक्ष राहुल यादव ने हमसे बातचीत में कहा कि वह दौर भी बिहार में था जब अफिसर मतलब सवर्ण समाज हुआ करता था। 90 के दशक बाद बिहार के राजनितिक में लालू यादव का उदय ने पिछड़ों को जो मुंह में बोली देने का काम किया आज उसका फल सामने आने लगा है। भाई की सफलता पर खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि आज हम लोगों को उनपे गर्व है।
सुशील कुमार (फाईल फोटो)
वहीं दुसरे सफलता प्राप्त करने वाले प्रखंड के तरियामा पंचायत के तरियामा गांव निवासी किसान रामस्वरूप साह/रामपड़ी देवी के पुत्र सुशील कुमार की तो वे बिहार लोक सेवा आयोग की परीक्षा में सफलता प्राप्त कर किसी नगर परिषद के कुर्सी को सुसोभित कर कार्यपालक पदाधिकारी बनेंगे। उन्होंने 467 वां रैंक के साथ 87 पोस्ट रैंक प्राप्त किया है। ऐसा नहीं है कि सुशील कुमार इससे पूर्व किसी प्रतियोगिता परीक्षा में सफलता प्राप्त नहीं किया हो लेकिन लक्ष्य तो कही ओर थी। वर्तमान समय मे दिल्ली यूनिवर्सिटी में सहायक प्रोफेसर के पद पर कार्यरत सुशील कुमार के इस उपलब्धि पर परिजनों में काफी खुशी व्याप्त है। 

शिक्षिका बहन सुलेखा देवी, भाई हेमंत कुमार कहते है कि आज उसने समाज के साथ इस खानदान का नाम रौशन किया है। इनकी प्रारंभिक शिक्षा गांव में ही हुआ। जिला स्कूल सहरसा से मेट्रिक, कोसी कॉलेज खगरिया से बीए तो एमए पटना यूनिवर्सिटी से पास किया। उसकी सफलता से गांव के लोगों में भी खुशी का माहौल है। 

Sunday, 19 August 2018

आज ही के दिन पांच वर्ष पूर्व हुआ था राज्यरानी ट्रेन से कटकर 28 श्रद्धालुओं की मौत

💐💐 राज्यरानी एक्सप्रेस ट्रेन कांड की पांचवी बरसी पर विशेष रिपोर्ट  💐💐

➡ पांचवी बरसी पर भी विकास की बाट जोह रहा धमारा घाट स्टेशन

➡ इसी स्टेशन पर 19 अगस्त 13 को ट्रेन से कट कर 28 श्रद्धालुओं की मौत हो गई थी

➡ आक्रोशित लोगो ने राज्यरानी के कई बोगीयों में लगा दी थी आग

धमारा घाट से लौटकर🖋 ब्रजेश भारती की विशेष रिपोर्ट :-
हादसे की फाईल फोटो
पूर्व मध्य रेलवे अंतर्गत सहरसा-मानसी रेलखंड के धमारा घाट स्टेशन पर राज्यरानी एक्सप्रेस कांड हादसे की आज पांच वर्ष बीत चुका हैं।आज ही के दिन 19 अगस्त 2013 को घमारा घाट स्टेशन पर मां कत्यायानी मंदिर जाने वाले 28 श्रद्धालुओं की मौत ट्रेन से कट पटरी पर हो गई थी।
आज पांच वर्ष बाद भी विकास से जुड़ा कोई भी ऐसा बदलाव नही दिख रहा हैं जिससे यह प्रतित हो कि इस घटना से रेलवे स्टेशन या राज्य सरकार ने कुछ सबक लिया हो, हलांकि धमारा घाट स्टेशन पर तीन साल पूर्व ही विकास की दिशा मे कई कार्यों की शुरुआत की गई परन्तु उन कार्यो की रफ्तार इतनी मंथर गति से चल रही हैं की कार्य कब पूर्ण हो यह कह पाना असम्भव दिख रहा हैं।
घटना के बाद जिन कार्यों की शुरुआत की गई उनमे प्लेटफोर्म ऊँचीकरण, प्लेटफोर्म विस्तारीकरण आदि कार्य शामिल हैं।इसके अलावे 415 मीटर लम्बा फुट ओवरब्रिज कार्य की भी शुरुआत की गई लेकिन वर्तमान स्थिति यह है कि फुट ओवरब्रिज को छोड़ कर सभी कार्य अधर मे लटके पड़े है। कुछ कार्य चल रहे हैं लेकिन वह जिस गति से हो रहा है मानो कब पुरा होगा कोई नहीं जानता।
यहां बताते चलें कि धमारा घाट स्टेशन पुरे भारत मे उस वक्त सुर्खियों मे तब आया जब आज से चार वर्ष पूर्व 19 अगस्त 2013 की सुबह सहरसा-पटना राज्यरानी एक्सप्रेस ट्रेन जब घमारा घाट स्टेशन से गुजर रही थी उसी वक्त पटरी पार कर मां कत्यायानी मंदिर जा रहे सैकड़ों श्रद्धालु ट्रेन की चपेट में आ गई जिसमें अधिकारीक तौर पर 28 लोगो की मौत हो गई थी वही दर्जनों बुरी तरह जख्मी हो गया था। इस घटना के बाद आक्रोशित लोगो ने बोगी में आग लगा जमकर प्रदर्शन किया था। घटित घटना से पुरे भारत मे राजनीतिक हड़कम्प मच गया।तात्कालीन रेल राज्य मंत्री अधीर रंजन चौधरी ने भी घटना की शाम धमारा स्टेशन का दौरा किया और स्टेशन को विकसित करने का आश्वाशन भी दिया गया था।
इसके साथ ही सामाजिक व राजनीतिक कार्यकर्ताओं द्वारा धमारा स्टेशन के विकास की मांग की गई।रेल हादसे के दो दिन बाद 21 अगस्त 13 से युवा शक्ति के प्रदेश अध्यक्ष नागेंद्र सिंह त्यागी, आम आदमी पार्टी से जुड़े लोगो व लोक गायक छैला बिहारी ने धमारा घाट स्टेशन पर आमरण अनशन की शुरुआत की थी।25 अगस्त को तत्कालीन डीडीसी सुरेश चौधरी एवं रेल विभाग के एडिशनल डिविजन मैनेजर एनएस पटियाल ने धमारा घाट स्टेशन के प्लेटफार्म संख्या एक को 232 मीटर बढ़ाने, प्लेटफार्म संख्या दो पर 415 मीटर लंबा प्लेटफॉर्म का निर्माण, एक से दो पर जाने के लिए फुटओवर ब्रिज निर्माण की स्वीकृति की बात कही थी।
वही डीडीसी द्वारा प्लेटफार्म नंबर तीन पर दोनों साइड से लोहे की जाफरी लगाये जाने की बात कही गई थी।उसके बाद 28 अगस्त 13 को अपराह्न लगभग चार बजे राज्य सरकार के तत्कालीन एसडीपीओ राजीव रंजन, रेल विभाग के कई कर्मी धमारा घाट रेलवे स्टेशन पहुंच कर तत्कालीन खगड़िया जिला पदाधिकारी द्वारा भेजे पत्र में राज्य सरकार के सचिव प्रत्यय अमृत द्वारा बदला घाट से कोपरिया तक सड़क निर्माण की स्वीकृति, मां कात्यायनी स्थान को राष्ट्रीय पर्यटक स्थल घोषित करने की अनुशंसा केंद्र सरकार को भेजे जाने का उल्लेख किया गया था। इसके उपरांत अनशनकारियों ने अनशन समाप्त करने की घोषणा की थी।
लेकिन पांच वर्ष पूरा होने के बावजूद आज तक सारे वादे अधूरे ही है।हां, धमारा घाट स्टेशन पर कुछ कार्य जरूर हुए जो नाकाफी है साथ साथ राज्य सरकार द्वारा भी मानसी से कोपरिया के बीच सीधी सडक बनाने की बात हुई।लेकिन,घटना के पांच वर्ष बाद भी जमीनी स्तर पर उन बातों और वादों को हकीकत बनने मे काफी समय लगने की उम्मीद है।
वर्तमान मे धमारा स्टेशन पर प्लेटफोर्म ऊँचीकरण का काम चल रहा है वही अब तक जाफरी भी नही लगी है।पूर्ण कार्य के रूप मे रेलवे द्वारा लगाया गया स्टेशन पर लाउडस्पीकर और फुट ओवरब्रिज ही वादों और हकीकत की पोल खोलते है और यदि बात राज्य सरकार द्वारा प्रस्तावित बदला-कोपड़िया सड़क की करे तो उस कार्य की भी गति काफी मंथर है और अभी तक सलखुआ से फनगो हॉल्ट तक ही सड़क बन पाई है।आज भी कांवरिये या कात्यानी माँ के भक्त रेलवे लाइन और रेल पुल के द्वारा ही आना-जाना करते है जिस कारण हमेशा दुर्घटना की आशंका बनी रहती हैं।
इस हादसे के बाद भी फिर एक हादसा हो चुका है -

तीन वर्ष पूर्व भी 9 अगस्त 15 (रविवार) को  कात्यायनी मन्दिर के निकट पुल नं 50 पर बड़ा हादसा होते - होते बचा जब कांवरियो से खचाखच भरी पुल पर 18698 पटना-मुरलीगंज कोशी एक्सप्रेस आ गई।हालाँकि,ड्राईवर की सूझ-बुझ इस घटना को नाकाम करने मे सहायक सिद्ध हुई हैं।
हादसे की कहानी पीड़ीत की जुबानी -

वही पांच वर्ष पूर्व राज्यरानी ट्रेन हादसे मे अकाल मृत्यु की शिकार हुई सलखुआ प्रखण्ड अंतर्गत मुबारकपुर गांव के शर्मा टोला निवासी रामपरी देवी की चर्चा होते ही परिजनों के आँखों मे अश्रुधारा बहने लगती है।रामपरी देवी का पुत्र मिथुन शर्मा माँ की चर्चा होते हुए कहता है कि मुआवजा ले लो, मगर मेरी माँ लौटा दो।वही इसी टोले की गोंडी देवी इस घटना मे बाल-बाल बच गई।गोंडी देवी बताती है कि चार दिनों तक वह अपना सुध-बुध खो बैठी थी, नजर के सामने दर्जनों लोगो के लाशो को देखा वही कटे पैर व बदन पटरी के किनारे यू ही बिखरा हुआ था। कईयो को काल के गाल मे जाते देखा।गोंडी देवी घटना के पांच वर्ष बाद भी इस चीज पर अड़ी है कि राज्यरानी के ड्राईवर ने हॉर्न नही बजाई और यदि बजाई होती तो यह हादसा ना होता।

Wednesday, 2 May 2018

जुलाई से चोरी का मोबाइल हो जाएगा कचरा, आसानी से होगा ट्रैक

देश में एक ही आईएमईआई नंबर पर अभी चल रहे हैं18 हजार हैंडसेट

आईएमईआई नंबर बदलने की स्थिति में मोबाइल महज खिलौना रह जाएगा

सी-डॉट ने मोबाइल उपकरण रजिस्टर-एमईआर तंत्र कर लिया तैयार

डेक्स की रिपोर्ट :-

वह दिन दूर नहीं, जब चोरी के लाखों मोबाइल कूड़ा हो जाएंगे। चोरों के लिए मोबाइल की चोरी कमाई का जरिया नहीं, बल्कि मुसीबत का सबब बन जाएगी। चोरी के मोबाइल का इस्तेमाल करने वाला पलक झपकते ही गिरफ्त में आ जाएगा।
दरअसल, दूरसंचार प्रौद्योगिकी केंद्र (सी-डॉट) ने मोबाइल उपकरण रजिस्टर-एमईआर तंत्र तैयार कर लिया है। इससे चोरी का मोबाइल मिनटों में और आसानी से ट्रैक हो जाएगा, जबकि आईएमईआई नंबर बदलने की स्थिति में यह महज खिलौना रह जाएगा।

सी-डॉट के कार्यकारी निदेशक विपिन त्यागी के मुताबिक, मोबाइल की चोरी या लूट की समस्या से निजात दिलाने के लिए एमईआर को जुलाई से चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा। इस तंत्र का ट्रायल महाराष्ट्र में पूरा होते ही अगले माह से इसे पुलिस के सुपुर्द कर दिया जाएगा। बीते कुछ सालों से रोजाना हजारों मोबाइल चोरी व लूट की घटनाओं को देखते हुए सी-डॉट को यह बीड़ा सौंपा गया है। देश में एक ही आईएमईआई नंबर पर 18 हजार हैंडसेट चल रहे हैं। एमईआर तंत्र में वैश्विक तंत्र मोबाइल संघ (जीएसएमए) की ओर से जारी आईएमईआई का ही इस्तेमाल होगा।

आईएमईआई के बिना नहीं चलेगा कोई सिम -

जीएसएमए वह संस्था है जो हरेक मोबाइल के लिए आईएमईआई नंबर जारी करती है। इस नंबर के बिना कोई भी सिम मोबाइल में नहीं चल सकता। सी-डॉट एमईआर तंत्र के लिए सेवा प्रदाता को भी जिम्मेदार बनाने जा रहा है। इसके तहत टेलीकॉम कंपनियां मोबाइल के लिए जारी आईएमईआई का मिलान जीएसएमए के डाटा से करेंगी।

मिलान नहीं होने पर मोबाइल में सिग्नल नहीं आएंगे और वह कूड़ा हो जाएगा। वहीं बदलाव किए बिना इस्तेमाल हो रहे चोरी के मोबाइल को एमईआर तंत्र से पुलिस कुछ ही पल में ट्रैक कर लेगी। अंतरराष्ट्रीय मोबाइल उपकरण पहचान नंबर (आईएमईआई) से छेड़छाड़ पर रोक के लिए भारतीय टेलीग्राफ अधिनियम की धारा-7 और 25 में संशोधन भी किया गया है।
साभार -अमर उजाला