स्वस्थ शरीर और तेज दिमाग के लिए किशोर-किशोरी को आयरन फॉलिक एसिड की नीली गोली अवश्य खिलाएं : डीएम
उत्क्रमित मध्य विद्यालय रायपुरा में आयोजित कार्यक्रम में हुई शुरुआत
सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) ब्रजेश भारती की रिपोर्ट :-
स्वस्थ्य शरीर और तेज़ दिमाग के लिए एनीमिया को दूर करना होगा और हर किशोर- किशोरी को आयरन फॉलिक एसिड की नीली गोली खिलाना है ।
उक्त बातें बुधवार को जिलाधिकारी शैलजा शर्मा ने सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र के उत्क्रमित मध्य विद्यालय रायपुरा में आयोजित सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कही।
उन्होंने कहा कि सभी सरकारी स्कूल आंगनवाड़ी केंद्र पर आयरन फोलिक एसिड की नीली गोली उपलब्ध करा दी गई है। वर्ग छठी से लेकर 12वीं तक के हर किशोर किशोरियों को प्रत्येक बुधवार नाश्ता करने के बाद स्कूल में अथवा आंगनवाड़ी केंद्र पर शिक्षक सेविका के सामने ही गोली खा लेनी है।
उन्होंने कहा कि 10 से 19 आयु वर्ग की जो किशोर किशोरीयां स्कूल नहीं आती है उन्हें संबंधित आंगनबाड़ी केंद्र पर हर बुधवार को गोली खिलाई जाएगी। किशोर किशोरियों के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए खून में उचित मात्रा में आयरन का होना आवश्यक है। आयरन की कमी से एनीमिया नाम की बीमारी होती है यदि गर्भवती महिलाओं को एनीमिया है तो प्रसव उपरांत कम वजन के बच्चे जन्म लेंगे शिशु मृत्यु दर, मातृत्व मृत्यु दर काफी बढ़ जाएगा।
वहीं सिविल सर्जन ने कहा कि इस क्षेत्र में एनीमिया का प्रभाव काफी अधिक है एनीमिक होने से बच्चे शारीरिक मानसिक रूप से कमजोर होते हैं खेलने में सुस्ती बनी रहती है गर्भवती माताएं यदि एनीमिक है तो प्रसव में सारी समस्या उत्पन्न हो जाती है उन्होंने कहा कि फरवरी माह में जिले में डिवार्मिंग कार्यक्रम चलाया जाएगा।
वहीं जिला प्रतिरक्षण पदाधिकारी कुमार विवेकानंद झा ने बताया कि राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत यह कार्यक्रम चलाया जा रहा है 6 से 12 वर्ग के सिर्फ सरकारी स्कूल के बच्चों के लिए कार्यक्रम चलाया जा रहा है।
कार्यक्रम को जिला शिक्षा पदाधिकारी तकी अहमद, बीडीओ मनोज, प्रखंड प्रमुख सविता देवी, अरविंद सिंह कुशवाहा, पूर्व उपप्रमुख रधुनंदन सिंह, मुखिया राजकुमार चौधरी,एचएम अनिल भारती, डीपीओ केडीएस कुमारी रितिका सिन्हा, डीपीआरओ जय शंकर प्रसाद, डा कुमार विवेकानंद, डा आरूणेश, बनतेश नारायण, राहुल किशोर, डा उत्तम कुमार सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
क्या है यह कार्यक्रम -
पहले बिहार में 1 लाख जीवित बच्चों को जन्म देने के दौरान 205 माताओं की मृत्यु हो जाती थी जो अब घट कर 165 हो गई है, जिसे 70 तक लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।
इसके लिए बिहार में सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड कार्यक्रम की शुरुआत आज की जा रही है। किशोरावस्था (10-19 वर्ष) में अनीमिया को नियंत्रित करने के लिए सरकार ने सप्ताहिक आयरन फॉलिक एसिड अनुपूरण कार्यक्रम को शुरू किया है। किशोर-किशरियों को प्रति सप्ताह 100 मि0ग्रा आयरन और 0.5 मिलीग्राम फोलिक एसिड गोली दिया जाना है।
इस कार्यक्रम का प्रभाव -
इस कार्यक्रम की प्रभाव 12 करोड़ आबादी और 1 करोड़ 78 लाख बच्चों पर होगा। एक साल बाद इस पहल का सर्वेक्षण किया जाएगा ताकि इसके परिणाम की जानकारी मिलें। इस क्रम में 91 हज़ार आंगनवाड़ी, 68962 शिक्षकों, 17892 एएनएम और 4470 आशा सुगमकर्ता का प्रशिक्षण करवाया जा चुका है । बिहार में सभी बच्चों के लिए 92 करोड़ गोलियों की आवश्यकता है जिसमे 30 करोड़ गोलियों की आपूर्ति प्रखंड स्तर तक की जा चुकी है। योजना के क्रियान्वयन में शिक्षा और समाज कल्याण विभाग की भी भूमिका बहुत ही महत्वपूर्ण होगी। इस पहल से आगामी वर्षो में बिहार को एनीमिया मुक्त बनाया जा सकेगा।
कार्यक्रम का असर -
इस कार्यक्रम का असर यह होगा कि बच्चों के दिमाग तेज़ होगा तो वो पढाई में बेहतर करेंगे और आगे अपनी जिन्दगी में सफल होंगे। इस पहल में शिक्षा विभाग पूरा सहयोग सहित अन्य विभाग सहयोग कर रहा है। यह कार्यक्रम सुबे के सभी जिलों में 23 जनवरी से शुरू की गई है।







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