मुल रूप से कायस्थ टोला के रहने वाले अमृत सिन्हा की पांच फिल्में हुई दादा साहेब फाल्के अवार्ड के लिए नामित
फीचर फिल्में बनाने वाले अमृत को मिल चुकी है अन्तर्राष्ट्रीय पहचान
सहरसा से ब्रजेश भारती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :-
बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले एक लाल ने मुंबई में मचाया धमाल...!
मूल रूप से सहरसा के कायस्थ टोला के रहने वाले फ़िल्म निर्माता अमृत सिन्हा की पांच फीचर फिल्मों का चयन दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल के लिए किया गया है।
रंगमंच से निकलकर फिल्मों का सफर तय करने वाले अमृत अबतक कई फीचर फिल्मों का निर्माण कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। उनमें से पांच फिल्मों को नौवें दादा साहब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल के लिए नामित किया गया है।
बचपन से ही फिल्मों के शौकीन रहे अमृत सिन्हा 2016 से ही मुंबई जाकर फिल्म लाइन के क्षेत्र उतर गए। अमृत बताते हैं कि उन्होंने मुख्य रूप से फीचर फिल्म फेरस नाम से बनाई है जिसमे विजयराज, जाकिर हुसैन, गोपाल के सिंह, मायरा सिंह, दियांश शर्मा, मारूफ खान नाम के कलाकारों ने काम किया है. उसके अलावे शॉट फिल्म ब्लड डोनेशन का निर्माण किया जिसका नाम है रक्त प्रदाता जीवन दाता।
खजुराहो पर डॉक्युमेंट्री फ़िल्म बनाई जिसका नाम है खजूर वाटिका, स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर ए स्मॉल हैंड के नाम से फ़िल्म बनाई है. इसके अलावे एक अन्य फ़िल्म के लिए दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल अवार्ड में शामिल होने का उन्हें मौका मिला है।
अमृत आगे एक बुलेटिन नाम से फ़िल्म बनाने जा रहे हैं जिसमे बॉलीवुड के कई नामचीन कलाकार काम करेंगे। जिसका प्रोजेक्ट आगामी मार्च अप्रैल माह से शुरू होगा। अमृत बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही फ़िल्म लाइन में जाने के लिए प्रयासरत थे सिचुएशन बनती गई और वो फ़िल्म लाइन में आ गए।
अमृत बताते हैं कि वो अपने आदर्श के रूप में बॉलीवुड के बहुत सारे कलाकरों और प्रोड्यूसर की मेहनत को देखकर उनसे सीख लेते हैं। वहीं अमृत की कामयाबी से पिता सुधीर सिन्हा और माता पूनम सिन्हा बेहद खुश नजर आ रहे हैं। माता पूनम सिन्हा का कहना है कि अमृत को बचपन से ही फिल्म राइटिंग का शौक था जिसके वजह से आज उसे यह कामयाबी मिली है। वही सहरसा के इस लाल के धमाल से समुचे कोशीवासि अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
फीचर फिल्में बनाने वाले अमृत को मिल चुकी है अन्तर्राष्ट्रीय पहचान
सहरसा से ब्रजेश भारती की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट :-
बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले एक लाल ने मुंबई में मचाया धमाल...!
मूल रूप से सहरसा के कायस्थ टोला के रहने वाले फ़िल्म निर्माता अमृत सिन्हा की पांच फीचर फिल्मों का चयन दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल के लिए किया गया है।
रंगमंच से निकलकर फिल्मों का सफर तय करने वाले अमृत अबतक कई फीचर फिल्मों का निर्माण कर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं। उनमें से पांच फिल्मों को नौवें दादा साहब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल के लिए नामित किया गया है।
बचपन से ही फिल्मों के शौकीन रहे अमृत सिन्हा 2016 से ही मुंबई जाकर फिल्म लाइन के क्षेत्र उतर गए। अमृत बताते हैं कि उन्होंने मुख्य रूप से फीचर फिल्म फेरस नाम से बनाई है जिसमे विजयराज, जाकिर हुसैन, गोपाल के सिंह, मायरा सिंह, दियांश शर्मा, मारूफ खान नाम के कलाकारों ने काम किया है. उसके अलावे शॉट फिल्म ब्लड डोनेशन का निर्माण किया जिसका नाम है रक्त प्रदाता जीवन दाता।
खजुराहो पर डॉक्युमेंट्री फ़िल्म बनाई जिसका नाम है खजूर वाटिका, स्वच्छ भारत अभियान के नाम पर ए स्मॉल हैंड के नाम से फ़िल्म बनाई है. इसके अलावे एक अन्य फ़िल्म के लिए दादा साहेब फाल्के फ़िल्म फेस्टिवल अवार्ड में शामिल होने का उन्हें मौका मिला है।
अमृत आगे एक बुलेटिन नाम से फ़िल्म बनाने जा रहे हैं जिसमे बॉलीवुड के कई नामचीन कलाकार काम करेंगे। जिसका प्रोजेक्ट आगामी मार्च अप्रैल माह से शुरू होगा। अमृत बताते हैं कि उन्हें बचपन से ही फ़िल्म लाइन में जाने के लिए प्रयासरत थे सिचुएशन बनती गई और वो फ़िल्म लाइन में आ गए।
अमृत बताते हैं कि वो अपने आदर्श के रूप में बॉलीवुड के बहुत सारे कलाकरों और प्रोड्यूसर की मेहनत को देखकर उनसे सीख लेते हैं। वहीं अमृत की कामयाबी से पिता सुधीर सिन्हा और माता पूनम सिन्हा बेहद खुश नजर आ रहे हैं। माता पूनम सिन्हा का कहना है कि अमृत को बचपन से ही फिल्म राइटिंग का शौक था जिसके वजह से आज उसे यह कामयाबी मिली है। वही सहरसा के इस लाल के धमाल से समुचे कोशीवासि अपने आप को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।



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