14 वर्षों बाद सूनी आंगन में गूंजी थी झांड़ी में फेंक दी गई नवजात की किलकारी
अब गोद लेने की प्रक्रिया में आर्थिक स्थिति आ रही है आड़े, महिला जिलाधिकारी से एक मां को है आस
सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) ब्रजेश भारती की रिपोर्ट :-
सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र के महखड़ पंचायत के पनपीबी टोला में मुरारी साह के आंगन में 14 वर्षों के बाद झांड़ी में फेंक दी गई एक नवजात की किलकारी की गूंज को अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि चाइल्ड लाइन वाले ने किलकारी की गूंज को उठा अपने साथ लेकर चले गए।
बच्चे को लेकर चले जाने के बाद मां का रो-रो कर बुरा हाल बन गया है। वह अपने पति को बच्चे लाकर देने की गुहार लगा रही है लेकिन बेवस पति पत्नी को सिर्फ ढ़ाढस के अलावे कुछ देने की स्थिति में नहीं है।
वही बच्चे की गोद लेने में इस दम्पत्ति के समक्ष आर्थिक स्थिति रोड़ा बन पहाड़ बन गया है।
प्राप्त जानकारी मुताबिक सोमवार को सहरसा चाइल्ड लाइन ने सिमरी बख्तियारपुर पहुंच प्रशासन के सहयोग से बच्चे को अपने कब्जे में ले सहरसा लेकर चली गई। अब चाइल्ड लाइन वाले बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया करने की बात कह रहे हैं।
महखड़ पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या आठ निवासी मुरारी साह की पत्नी मीरा देवी का रो - रो कर बुरा हाल है। बीते लगभग चौदह वर्षो से संतान ना होने का दंश झेल रही इस परिवार का आंगन रविवार दोपहर बच्चे की किलकारी से रौनक हुआ था परंतु बच्चे के मिलने के चौबीस घंटे बाद ही इस आंगन में मायूसी छा गई है। फफकते हुए मां कहती है, कि ईश्वर ने इतने सालों बाद इस घर को बच्चे की सौगात दी परंतु कुछ घंटों बाद ही बच्चे का छीन लिया जाना रुला गया। मां कहती है कि परिवार की स्थिति सही नही है, चाइल्ड लाइन ने प्रक्रिया के तहत उस बच्चे को गोद लेने का खर्च पचास हजार बताया गया है। अब हम गरीव पैसे दे पाने में असमर्थ है। इसलिए जिलाधिकारी से बच्चे को वापस लौटाने की गुहार लगा रहे है। एक महिला दूसरी मां का दर्द समझेंगी।
क्या है पुरा मामला
बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के महखड़ पंचायत के पनपीबी टोला में रविवार सुबह नहर किनारे बांस की झाड़ियों में कंपकंपाती ठंड में एक नवजात बच्ची फेकी पाई गई थी। बच्ची की रोने की आवाज देखने स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ लग गई। इसी दौरान गांव की ही वार्ड संख्या 8 निवासी मुरारी साह की पत्नी मीरा देवी की ममता उस बच्ची पर आ गयी वो उस बच्ची को उठाकर अपने पास रख ली एवं उसकी देखभाल करने लगी।
लेकिन सोमवार दोपहर सहरसा चाइल्ड लाइन ने महखड़ पहुंच बच्चे को अपने कब्जे में ले सहरसा लेकर चली गई। अब चाइल्ड लाइन बच्चे को सरकारी प्रकिया के तहत गोद लेने का खर्च लगभग चालीस हजार बता रही है। जिसे दे पाने में माँ - पिता असमर्थ है। पहले से गरीबी का दंश झेल रहे इस परिवार में एक बच्ची के आगमन ने खुश था।
विधिवत बच्ची का छठि मनाने का समय बन रहा था परंतु अब बच्चे के चाइल्ड लाइन चले जाने के बाद सारी उम्मीदे सहरसा जिलाधिकारी शैलजा शर्मा पर टिकी है।
इधर इस संबंध में जब सहरसा चाइल्ड लाइन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि विधिवत गोद लेने के लिए 1000 रूपये रजिस्ट्रेशन कराने के समय लगता है। एवं जिस समय बच्चा दिया जाता है, उस समय 45000 रूपया सरकार के नाम से ड्राफ्ट बनता है।
अब गोद लेने की प्रक्रिया में आर्थिक स्थिति आ रही है आड़े, महिला जिलाधिकारी से एक मां को है आस
सिमरी बख्तियारपुर(सहरसा) ब्रजेश भारती की रिपोर्ट :-
सहरसा जिले के सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र के महखड़ पंचायत के पनपीबी टोला में मुरारी साह के आंगन में 14 वर्षों के बाद झांड़ी में फेंक दी गई एक नवजात की किलकारी की गूंज को अभी 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि चाइल्ड लाइन वाले ने किलकारी की गूंज को उठा अपने साथ लेकर चले गए।
बच्चे को लेकर चले जाने के बाद मां का रो-रो कर बुरा हाल बन गया है। वह अपने पति को बच्चे लाकर देने की गुहार लगा रही है लेकिन बेवस पति पत्नी को सिर्फ ढ़ाढस के अलावे कुछ देने की स्थिति में नहीं है।
वही बच्चे की गोद लेने में इस दम्पत्ति के समक्ष आर्थिक स्थिति रोड़ा बन पहाड़ बन गया है।
प्राप्त जानकारी मुताबिक सोमवार को सहरसा चाइल्ड लाइन ने सिमरी बख्तियारपुर पहुंच प्रशासन के सहयोग से बच्चे को अपने कब्जे में ले सहरसा लेकर चली गई। अब चाइल्ड लाइन वाले बच्चे को गोद लेने की प्रक्रिया करने की बात कह रहे हैं।
महखड़ पंचायत अंतर्गत वार्ड संख्या आठ निवासी मुरारी साह की पत्नी मीरा देवी का रो - रो कर बुरा हाल है। बीते लगभग चौदह वर्षो से संतान ना होने का दंश झेल रही इस परिवार का आंगन रविवार दोपहर बच्चे की किलकारी से रौनक हुआ था परंतु बच्चे के मिलने के चौबीस घंटे बाद ही इस आंगन में मायूसी छा गई है। फफकते हुए मां कहती है, कि ईश्वर ने इतने सालों बाद इस घर को बच्चे की सौगात दी परंतु कुछ घंटों बाद ही बच्चे का छीन लिया जाना रुला गया। मां कहती है कि परिवार की स्थिति सही नही है, चाइल्ड लाइन ने प्रक्रिया के तहत उस बच्चे को गोद लेने का खर्च पचास हजार बताया गया है। अब हम गरीव पैसे दे पाने में असमर्थ है। इसलिए जिलाधिकारी से बच्चे को वापस लौटाने की गुहार लगा रहे है। एक महिला दूसरी मां का दर्द समझेंगी।
क्या है पुरा मामला
बख्तियारपुर थाना क्षेत्र के महखड़ पंचायत के पनपीबी टोला में रविवार सुबह नहर किनारे बांस की झाड़ियों में कंपकंपाती ठंड में एक नवजात बच्ची फेकी पाई गई थी। बच्ची की रोने की आवाज देखने स्थानीय ग्रामीणों की भीड़ लग गई। इसी दौरान गांव की ही वार्ड संख्या 8 निवासी मुरारी साह की पत्नी मीरा देवी की ममता उस बच्ची पर आ गयी वो उस बच्ची को उठाकर अपने पास रख ली एवं उसकी देखभाल करने लगी।
लेकिन सोमवार दोपहर सहरसा चाइल्ड लाइन ने महखड़ पहुंच बच्चे को अपने कब्जे में ले सहरसा लेकर चली गई। अब चाइल्ड लाइन बच्चे को सरकारी प्रकिया के तहत गोद लेने का खर्च लगभग चालीस हजार बता रही है। जिसे दे पाने में माँ - पिता असमर्थ है। पहले से गरीबी का दंश झेल रहे इस परिवार में एक बच्ची के आगमन ने खुश था।
विधिवत बच्ची का छठि मनाने का समय बन रहा था परंतु अब बच्चे के चाइल्ड लाइन चले जाने के बाद सारी उम्मीदे सहरसा जिलाधिकारी शैलजा शर्मा पर टिकी है।
इधर इस संबंध में जब सहरसा चाइल्ड लाइन से बात की गई तो उन्होंने कहा कि विधिवत गोद लेने के लिए 1000 रूपये रजिस्ट्रेशन कराने के समय लगता है। एवं जिस समय बच्चा दिया जाता है, उस समय 45000 रूपया सरकार के नाम से ड्राफ्ट बनता है।




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