Wednesday, 16 January 2019

डीएमसीएच दरभंगा में नहीं बनेगा एम्स, सहरसा में जश्न

केन्द्रीय स्वास्थ्य मंत्री नड्‌डा ने मुख्यमंत्री को लिखी चिट्‌ठी

दरभंगा या किसी अन्य शहर में कोई दूसरी जगह बताएं

सहरसा से ब्रजेश भारती की रिपोर्ट -

बुधवार सुबह कोसी इलाके के लिए एक बड़ी खबर आई। सुबह सबेरे दैनिक भास्कर की एक खबर ने पूरे कोसी इलाके के लोगो के लिए एक उम्मीद की किरण खोज दी।

बुधवार को नई दिल्ली से जुड़ी खबर डीएमसीएच दरभंगा में एम्स अस्पताल बनाने के राज्य सरकार के प्रस्ताव खारिज होने की जानकारी खबर  के माध्यम से सार्वजनिक हो जाने के बाद खबर की कटिंग सहरसा सहित कोशी में सोशल मीडिया पर वायरल होने लगी। लोकल वाट्सऐप ग्रुप से लेकर फेसबुक पर सभी इससे जुड़े लोग खबर को शेयर करने लगा। 
दरभंगा में एम्स ठुकराए जाने के बाद सहरसा में जश्न का माहौल देखा गया। हर एक व्यक्ति को सहरसा में एम्स की आस जग गई है। सहरसा में एम्स आन्दोलन से जुड़े प्रवीण आनंद, रितेश रंजन, विनोद झा व पूर्व बीडीओ गौतम कृष्ण आदि ने कहा कि सहरसा में एम्स मांग नहीं जरूरत है। जान बूझ कर एक सोची समझी रणनीति के तहत वहां भेजा जा रहा था। अतंत: उपर वाले ने भी यहां के लिए इंसाफ किया है। 
यहां बताते चलें कि सहरसा में एम्स की मांग को लेकर विगत तीन वर्षों से आन्दोलन चल रहा है। हाल के दिनों में सिलसिले वार अनशन भी शुरू हुआ। इसी क्रम में डाक्टर के साथ कान पकड़कर उठक बैठक मामला देश स्तर पर सुर्खियों में जगह बनाया था।
क्या है पुरा मामला दैनिक भास्कर के हवाले से -

बिहार में दूसरा एम्स बनने में अभी और देरी लगेगी। क्योंकि, राज्य सरकार की ओर से दरभंगा मेडिकल कॉलेज अस्पताल (डीएमसीएच) में एम्स बनाने की सिफारिश को केन्द्र सरकार ने नामंजूर कर दिया है। केन्द्र ने स्पष्ट कहा है कि डीएमसीएच परिसर को एम्स के तौर पर विकसित करना मुश्किल है। लिहाजा, एम्स के लिए दरभंगा में ही कोई और जगह या किसी अन्य शहर में कोई जगह बताएं।

टेक्निकल टीम की रिपोर्ट -

केंद्र के इस फैसले की जानकारी केन्द्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री जेपी नड्‌डा ने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को लिखित तौर पर दे दी है। राज्य सरकार के अाग्रह पर डीएमसीएच में केन्द्र से एक टेक्निकल टीम भेजी गई थी, टेक्निकल टीम की रिपोर्ट के अनुसार डीएमसीएच में एम्स शुरू नहीं हो सकता।
मुख्यमंत्री को लिखी चिट्‌ठी में ये कारण बताए
निचले हिस्से में बना है डीएमसीएच, बाढ़ व बरसात के समय दिक्कत होगी कैंपस के बीच से गुजरता है पब्लिक रोड, एक हिस्सा रेलवे लाइन के पार है।

सबसे बड़ी रुकावट -

डीएमसीएच निचले इलाके में स्थित है, जिससे बाढ़ और बरसात के दिनों में दिक्कत होगी। डीएमसीएच चार ब्लॉक में बंटा है और कैंपस के बीच से ही पब्लिक रोड गुजर रही है।  कॉलेज का एक हिस्सा रेलवे लाइन की दूसरी ओर है। ऐसे में पब्लिक रोड को डायवर्ट करना और रेलवे लाइन की दूसरी ओर की भूमि को ओवर ब्रिज से जोड़ना होगा। लेकिन, यह पूरा इलाका हेरिटेज है। लिहाजा, यहां की बिल्डिंग को तोड़ना मुश्किल है। डीएमसीएच कैंपस में अतिक्रमण इतना ज्यादा है कि उसे हटाने में ही बहुत समय लग जाएगा। यहां की करीब-करीब सभी ब्लॉक एम्स के मानक के अनुरूप नहीं हैं। ऐसे में इन्हें तोड़कर नए सिरे से बनाना होगा, जो आसान नहीं है।  हॉस्पिटल, हॉस्टल, बैंक, पोस्ट ऑफिस और पुलिस पोस्ट सबको शिफ्ट करना भी कठिन है। यहां के डाॅक्टर्स और स्टाफ को भी शिफ्ट करना मुश्किल है। इन कमियों को पूरा करने में बहुत वक्त लगेगा।
3 साल पहले हुई थी एम्स की घोषणा -

वित्त वर्ष-2015-16 में केन्द्र ने बिहार में एक और एम्स बनाने की घोषणा की थी। करीब तीन वर्ष बीतने के बाद भी जगह तय नहीं हो पाई है। केन्द्र की ओर से कई बार चिट्‌टी लिखने के बाद भी राज्य की ओर से पहले कहा गया कि आप खुद जगह तय कर लें। लेकिन केन्द्र ने मना किया तब राज्य सरकार की ओर से डीएमसीएच को ही एम्स में कनवर्ट करने को कहा गया। एम्स के लिए 200 एकड़ भूमि की जरूरत होती है।

कुछ आपत्ति गलत, बाकी का हल संभव : स्वास्थ्य सचिव

स्वास्थ्य विभाग के प्रधान सचिव संजय कुमार ने कहा कि अभी उन्हें वह चिट्‌ठी नहीं मिली है। इस संबंध में सीएम का जो निर्देश होगा, उसका पालन करेंगे। जहां तक डीएमसीएच परिसर के लो लैंड का सवाल है, वहां ड्रेनेज सिस्टम विकसित कर स्थायी समाधान संभव है। एम्स के लिए चिह्नित जमीन के बीच से रेलवे लाइन नहीं गुजरती है। हैरिटेज बिल्डिंग पर कहा कि एम्स के लिए वैसे भवनों को तोड़ने की जरूरत नहीं पड़ेगी।
श्रोत - Dainik Bhaskar नई दिल्ली (पवन कुमार) 
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