Sunday, 28 October 2018

Saharsa : सलखुआ के दियारा में शिक्षा व्यवस्था भगवान भरोसे

मध्य विद्यालय साम्हर, मध्य विद्यालय कबीरपुर सहित अन्य में कई अनियमितता

बीडीओ ने जांचोपरांत कई शिक्षकों की अनुपस्थिति पर काटी हाजरी

सिमरी बख्तियारपुर (सहरसा) Brajesh Bharti.
कुछ इस कदर पढ़ते हैं साम्हर स्कूल के बच्चे
अनुमंडल क्षेत्र के सलखुआ प्रखंड अन्तर्गत कोशी दियारा में स्कूली शिक्षा भगवान भरोसे है। यहां पठन पाठन के नाम पर खानापूर्ति की जा रही है। यहां बच्चों की उपस्थिति की कौन कहे अधिकांश शिक्षक विद्यालय से गायब रहते हैं। 
मध्य विद्यालय साम्हर भवन
शनिवार को सांसद चौधरी महबूब अली के दियारा क्षेत्र भ्रमण के क्रम में साथ चल रहे सलखुआ बीडीओ प्रेम कुमार ने मध्य विद्यालय कबीरपुर का निरक्षण किया तो कुल 9 शिक्षकों में चार शिक्षक विद्यालय से गायब थे उन्होंने सभी गायब शिक्षकों की हाजरी काट स्पष्टीकरण करने की बात कही है। 
मध्य विद्यालय कबीरपुर में बने खिलाड़ी से दाल नदारद
इस विद्यालय में स्कूल भवन चारागाह बना था। 452 नामांकित बच्चों में एक कमड़े में सौ की संख्या में बच्चे एक शिक्षक उन बच्चों को गिनती का पहाड़ा गिनवा रहे थे। एक शिक्षक आफिस में बैठ नजर आए। बीडीओ प्रेम कुमार यादव ने हाजरी रजिस्टर का अवलोकन कर अनुपस्थित शिक्षक संगीता कुमारी, मो कमर फारूक, केशरी कुमार, विद्यानंद कुमार का हाजिरी काट स्पष्टीकरण करने की बात कही। 
उत्क्रमित उच्चतर माध्यमिक विद्यालय का अधुरा भवन
इस विद्यालय के एक कमड़े में रसोईया एमडीएम बना रहे थे यहां बनाए जा रहे खिचड़ी में दाल नदारद नजर आया। ग्रामीणों का कहना था कि यहां अक्सर खिचड़ी ही बनता है मीनू के मुताबिक खाना बच्चों को यदा कदा ही दी जाती है। पठन पाठन तो पुछना ही सुरज को दिया दिखाने के समान है। स्कूल को चार दिवारी नहीं है काफी परेशानी होती है। शौचालय बदहाल है। 
कबीरपुर में निरीक्षण करते बीडीओ
मध्य विद्यालय साम्हर में बच्चे की संख्या नामांकन के अनुसार 439 है लेकिन उपस्थित आधे से कम नजर आई। यहां 18 पद स्थापित है लेकिन अधिकांश किसी ना किसी कारण से नजर नहीं आए। यू तो यह विद्यालय उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय बन गया है लेकिन अधूरा भवन अपने आप में माध्यमिक विद्यालय की कहानी कह रही है।
एक कमड़े में पुरी स्कूल
यहां एमडीएम चावल के अभाव में बंद रहने की बात उपस्थित शिक्षक ने बताई जबकि सोमवार को ही विद्यालय में चावल पहुंचा दी गई थी। कई ग्रामीणों ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया कि करीब एक माह से बच्चों को दोपहर का भोजन नहीं मिला है। मनमर्जी से स्कूल चलता है कोई देखने वाला नहीं है। सब मिलीभगत कर शिक्षा व्यवस्था को चौपट कर दिया है। 

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